अलबरूनी और उसका भारत वर्णन Useful notes 2022

अलबरूनी

अलबरूनी
  • अलबरूनी पूर्व मध्यकाल का एक प्रसिद्ध विद्वान दार्शनिक लेखक और इतिहासज्ञ था |
  • मद्धेशिया के खीवा प्रदेश का रहने वाला था | जब महमूद गजनबी ने खीवा की विजय की तो वह अलबरूनी को बंदी बनाकर गजनी ले आया |
  • उसकी विद्वता और प्रतिभा से मुग्ध होकर सुल्तान ने उसे अपने दरबार में प्रतिष्ठित किया |
  • अलबरूनी के भारतीय आक्रमण के समय उसके साथ भारत आता जाता था |
  • उसने अपनी आंखों से भारत को देखा और संस्कृत भाषा का उसने गहन अध्ययन किया |
  • भारतीय पंडितों और भारतीय ग्रंथों को उसने पढ़ा हिंदू धर्म ग्रंथों शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान विज्ञान का अध्ययन किया भारतीय पंडितों और ब्राह्मणों के साथ उसने विचार विनिमय किए |
  • भारत के विषय में पूरी जानकारी और अपनी सूझबूझ के आधार पर अलबरूनी से तहकीक ए हिंद की रचना की |
  • इस ग्रंथ में उसने भारत की तत्कालीन राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दशा का जीवंत वर्णन किया है |
  • उसने जो कुछ भी लिखा है वह सत्य से अधिक निकट है और उसका प्रयास प्रशंसनीय है |
  • वह पहला मुस्लिम विद्वान है जिसने भारत का वर्णन स्वयं देख कर किया |

राजनीतिक दशा

  • भारत की राजनीतिक दशा का वर्णन करते हुए अलबरूनी ने लिखा है कि भारत एक विशाल देश है किंतु यहां छोटे-छोटे प्रांतीय राज्य है जिनके अधिकांश शासक राजपूत है |
  • देश अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था | कश्मीर, सिंध, मालवा तथा कन्नौज इनमें प्रमुख राज्य थे | इन राज्यों में काफी फूट एवं वैमनस्य था तथा छोटे-छोटे कारणों पर यह आपस में संघर्ष करते रहते थे |
  • विदेशी आक्रमणों का भय नहीं होने के कारण राजपूतों ने भारत की उत्तरी पश्चिमी सीमांत क्षेत्र की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की थी |
  • अलबरूनी ने यहां राजपूतों की न्यायप्रियता का अच्छा वर्णन किया है राजपूत नरेश न्याय प्रिय थे |
  • न्याय प्राप्त करने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत करना पड़ता था किंतु मौखिक प्रार्थनाएं भी की जा सकती थी | सब पद दिलवाने की प्रथा भी प्रचलित थी |
  • मुकदमों का निर्णय साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होते थे | न्याय सबके लिए समान नहीं था |
  • ब्राह्मण प्राण-दंड से मुक्त थे | दंड विधान कठोर नहीं, बल्कि व्यावहारिक था |
  • चोरी के अपराध का दंड चोरी गए धन के मूल्य के अनुरूप दिया जाता था | कुछ अपराधों के लिए अंग-भंग का दंड भी दिया जाता था | राजा जनहित और प्रचार के कार्य करना अपना धर्म मानते थे |
  • प्रत्येक राज्य में सामंती प्रथा थी तथा ऊंचे ऊंचे पद सामंतों को दिए जाते थे | यह पद परंपरागत होते थे |
  • राजपूतों की भावना बहुत ही अपने कुल के व्यक्ति की अधीनता में रहना राजपूत कभी भी सहन नहीं कर सकते थे |
  • भूमि की अच्छी व्यवस्था थी | उसका छठा भाग किसानों से भूमि के रूप में लिया जाता था | राज्य की आय का प्रमुख साधन होता था |
  • विभिन्न पेशे वाले और व्यवसाय करने वालों से कर लिया जाता था | किंतु यह कर उनसे कठोरता से नहीं वसूल किया जाता था |
  • ब्राह्मण सभी प्रकार के करो से मुक्त |

सामाजिक दशा

  • सामाजिक दशा का वर्णन करते हुए अलबरूनी ने लिखा है कि उस समय के समाज में जाति प्रथा की प्रधानता थी | किंतु राजपूतों के समाज में अनेक दोष गए थे अतः उनकी सामाजिक प्रगति लगभग रुक सी गई थी |
  • सती प्रथा और बाल विवाह की प्रथा का प्रचार काफी अधिक था | विधवा विवाह की प्रथा नहीं थी |
  • शादी विवाह में माता-पिता के निर्णय अंतिम होते थे | जाति बंधन इतना अधिक जटिल था कि अंतरजाति विवाह समाज में बंद हो गए थे |
  • हिंदू समाज की प्राचीन उदारता और लचीलापन लुप्त हो गया था | वह विदेशियों को अपने समाज में पहले की तरह आत्मसात करने में असमर्थ थे, किंतु अत्यंत स्वाभिमानी हो गए थे |
  • वह अपने समाज, धर्म, कला, ज्ञान-विज्ञान, धर्मशास्त्र, दर्शन एवं संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानते थे और किसी से कुछ भी सीखने के लिए तैयार नहीं थे |
  • वे अपने ज्ञान को अपने ही समाज में दूसरी जाति के लोगों को देने में बड़े हिचकते थे, अलबरूनी को स्वयं विज्ञान और दर्शन का अध्ययन करने में काफी कठिनाई हुई थी |
  • सत्य तो यह है कि इस समय विदेशों से भारत के संबंध और संपर्क छिन्न-भिन्न हो गए थे | विदेशों में होने वाली घटनाओं परिवर्तनों अविष्कारों से भारत सर्वथा अपरिचित रह गया था |
  • उसके पिछड़ेपन का यही कारण था | अलबरूनी लिखता है कि महमूद ने इस देश की समृद्धि को पूर्णतया समाप्त कर दिया तथा ऐसा आश्चर्यजनक उत्पीड़न जिससे हिंदू चतुर्दिक बिखरे हुए धूल के कणों के समान हो गए थे |
  • लोगों के मुख से यह सब पुरानी कहानी के रूप में रह गए हिंदुओं के अवशिष्ट अंश अपने मन में मुसलमान मात्र के प्रति घृणा की गौतम भावनाओं का पोषण करते थे |
  • यही कारण है कि भारतीय विद्या उन स्थानों से बहुत दूर हट गई है जिनकी हमने विजय कर ली है और कश्मीर बनारस तथा अन्य स्थानों पर पलायन कर गई है जहां तक अभी हमारे हाथ पहुंच नहीं पाते |

आर्थिक दशा

  • अलबरूनी ने स्पष्ट शब्दों में स्वीकार किया है कि उन दिनों भारत एक संपन्न देश था |
  • यहां के मंदिरों और मठों में व्यापार संपत्ति एकत्र की धनी और संपन्न व्यक्ति अपने धन का उपयोग प्राया मंदिर निर्माण में करते थे |
  • यद्यपि भारत के विदेशी व्यापारिक संबंध समाप्त हो गए थे परंतु उपजाऊ भूमि एवं खनिज पदार्थों की प्रचुरता के कारण भारत में आर्थिक स्थिति अच्छी थी |

धार्मिक दशा

  • भारत की धार्मिक स्थिति का वर्णन करते हुए अलबरूनी ने लिखा है कि हिंदू मूर्तिपूजक थे |
  • वे अनेक देवी देवताओं का पूजा करते थे | देवी देवताओं की मूर्तियां मंदिरों में प्रतिष्ठित की जाती थी |
  • हिंदू धर्म में अंधविश्वास और कुरीतियां उत्पन्न हो गई थी लोग जादू टोना शकुन अपशकुन भूत प्रेत मंत्र आदि में विश्वास करते थे |

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