Best notes ईरानी और मकदूनियाई आक्रमण:सिकंदर का आक्रमण 336ईसा पूर्व

ईरानी आक्रमण

सिकंदर

सिकंदर का चित्र

  • जिस समय मगध के राजा अपने साम्राज्य का विस्तार कर रहे थे उसी समय ईरान के हखमानी शासक भी अपने राज्य का विस्तार कर रहे थे |
  • भारत पर आक्रमण करने में प्रथम सफलता दारा प्रथम को प्राप्त हुई थी जो साइरस का उत्तराधिकारी था |
  • दारा प्रथम के तीन अभिलेखों बहीस्तून पर्सिपोलिस एवं नक्शेरुस्तम से यह सिद्ध होता है कि उसी ने सर्वप्रथम सिंधु नदी के तटवर्ती भारतीय भू-भागों को अधिकृत किया था |
  • उसने पंजाब सिंधु नदी के पश्चिम के क्षेत्रों और सिंध के कुछ क्षेत्रों को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया | यह क्षेत्र फ़ारस का 20 वां प्रांत या क्षत्रपी बन गया |
  • फ़ारस साम्राज्य में कुल 23 प्रांत थे | भारतीय क्षत्रपी में सिंधु,पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत व पंजाब के सिंधु नदी का पश्चिमी भाग सम्मिलित था |

संपर्क के परिणाम

  • ईरानी लिपिकार भारत में लेखन का एक विशेष रूप ले आए जो आगे चलकर खरोष्ठी के नाम से प्रसिद्ध हुआ |
  • यह लिपि अरबी की तरह दाई से बाई ओर लिखी जाती थी | पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत में ईरानी सिक्के भी मिले हैं जिनसे ईरान के साथ व्यापार होने का संकेत मिलता है |
  • अशोक कालीन स्मारक विशेषकर घंटा के आकार के गुंबद कुछ हद तक ईरानी प्रतिरूपों पर आधारित थे |
  • अशोक के राज्यदेशों की प्रस्तावना और उनमें प्रयुक्त शब्दों में इरानी प्रस्तावना व उनका प्रभाव देखा जा सकता है |
  • ईरानियों की सहायता से ही यूनानीयों को व्यापार की भारत में अपार संपत्ति की जानकारी मिली थी |

सिकंदर का आक्रमण

  • सिकंदर मेसिडोनिया के क्षत्रप फिलिप-II का पुत्र था | उस के आक्रमण के समय पश्चिमोत्तर भारत अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभक्त था जिनमें कुछ राज्य गणतंत्रात्त्मक एवं राजतंत्रात्त्मक थे जिन्हें अलग-अलग जितना सिकंदर के लिए आसान था |
  • वह यूनान के राज्य मकदूनिया का शासक था | वह अपने पिता की मृत्यु के बाद 336 ईसा पूर्व में गद्दी पर बैठा |
  • उसने काबुल व सींध के मध्य सिकंदरिया नामक नगर की स्थापना की | वह सिर्फ एशिया माइनर और इराक को ही नहीं बल्कि ईरान को भी जीत लिया इरान से वह भारत की ओर बढ़ा इतिहास के पिता कहे जाने वाले हेरोडोटस और यूनानी लेखकों ने भारत का वर्णन अपार संपत्ति वाले देश के रूप में किया था |
  • इसी वर्णन को पढ़कर सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रेरित हुआ था | ईसा पूर्व चौथी सदी में विश्व पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए यूनानी और ईरानियों के मध्य संघर्ष हुए |
  • सिकंदर के नेतृत्व में यूनानी ने आखिरकार ईरानी साम्राज्य को नष्ट कर दिया जिसके पश्चात वह भारत की ओर बढ़ा |
  • सिकंदर का भारत पर आक्रमण करने का मूल कारण उसकी धन प्राप्ति की लालसा थी |
  • वह खैबर दर्रे से होकर भारत आया तथा उसने अपना पहला आक्रमण तक्षशिला के राजा आम्भी और पोरस के विरुद्ध किया| तक्षशिला का राजा आम्भी और पोरस सुविख्यात राजा थे जिनका राज्य झेलम और चिनाब नदी के मध्य पड़ता था |
  • वे दोनों संयुक्त मोर्चा नहीं बना सके और ना ही खैबर दर्रे पर कोई प्रतिरक्षण था | तक्षशिला के शासक आम्भी ने सिकंदर के सामने समर्पण कर दिया |
  • भारतीय राजा की बहादुरी और साहस से प्रभावित होकर सिकंदर ने पोरस को राज्य वापस कर दिया और उसे अपना सहयोग बना लिया |
  • सिकंदर व्यास नदी की सीमा तक पहुंचा था वह पूर्व की ओर भी बढ़ना चाहता था परंतु उसकी सेना ने उसका साथ देने से इनकार कर दिया क्योंकि थक गए थे और बीमारियों से ग्रसित हो चुके थे |
  • यूनानी सैनिकों को यह ज्ञात था कि गंगा के तट पर एक शक्तिशाली साम्राज्य है | मगध पर नंद वंश का शासन था और उसकी सेना सिकंदर की सेना से कहीं अधिक विशाल थी जिसके कारण सिकंदर की सेना ने आगे बढ़ने तथा युद्ध करने से इंकार कर दिया था |
  • सिकंदर ने दुख भरे स्वर में कहा- मैं उन दिलो में उत्साह भरना चाहता हूं जो निष्ठाहीन और कायरतापूर्ण डर से दबे हुए हैं |
  • इस प्रकार वहां राजा जो अपने शत्रुओं से कभी नहीं हारा परंतु अपने ही लोगों से हार मानने को विवश हो गया |
  • वह भारत में लगभग 19 महीने 326-325 ईसा पूर्व रहा |
  • इस दौरान वह हमेशा युद्ध में लगा रहा वापसी के समय सिकंदर की सेना सिंधु नदी के मुहाने पर दो भागो- जल मार्ग तथा स्थल मार्ग में विभक्त हो गई |
  • भारतीय भूभाग पर सिकंदर की अंतिम विजय पाटिल राज्य के विरुद्ध थी |
  • उसने अपने भूभाग को तीन हिस्सों में बांट दिया और तीन यूनानी दो वरना रो गवर्नर के हाथ सौंप दिया |

सिकंदर के आक्रमण के परिणाम

  • इस आक्रमण का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम भारत और यूनान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में प्रत्यक्ष संपर्क की स्थापना थी |
  • सिकंदर के अभियान से चार भिन्न-भिन्न मार्गो और जल मार्गों के द्वार खुल गए |
  • भारत में गांधार शैली की कला जिसका विकास द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ वह यूनानी प्रभाव का ही परिणाम है | इससे यूनानी व्यापारियों और शिल्पी के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ तथा व्यापार की तत्कालीन सुविधाएं बढ़ी |
  • आक्रमण के परिणाम स्वरूप इन क्षेत्रों में यूनानी उपनिवेश स्थापित हुए | उनमें झेलम के तट पर बुकेफला और सिंधु के तट पर सिकंदरिया का अधिक महत्व था |
  • सिकंदर के इतिहासकार मूल्यवान भौगोलिक विवरण छोड़ गए जिसमें उन्होंने सिकंदर के अभियान का तिथि सहित इतिहास लिखा है |
  • इससे हमें भारत में हुई घटनाओं का तिथि क्रम इतिहास तैयार करते करने में सहायता मिलती है |
  • सिकंदर के इतिहासकार हमें सामाजिक और आर्थिक स्थिति के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं | वह हमें सती प्रथा गरीब मां-बाप द्वारा अपनी पुत्रियों को बेचने और पश्चिमोत्तर भारत के उत्तर नस्ल वाले गाय बैलों के विषय में बताते हैं |
  • पश्चिमोत्तर भारत के छोटे-छोटे राज्यों की सत्ता को नष्ट कर सिकंदर के आक्रमण ने इस क्षेत्र में मौर्य साम्राज्य के विस्तार का मार्ग प्रशस्त किया |

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