महमूद गजनवी:आक्रमण के समय भारत की स्थिति (998-1030AD) Best Notes

महमूद गजनवी
  • विदेशी आक्रमण के संदर्भ में किसी देश की राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थिति का महत्व काफी अधिक होता है |
  • अगर इन दृष्टिकोण से देश की स्थिति मजबूत बनती है तो आक्रमणकारियों की एक नहीं चल पाती किंतु ठीक इसके विपरीत यदि देश कमजोर रहता है तो आक्रमणकारियों की बन जाती है |
  • तुर्की आक्रमण का प्रारंभ भारत में यद्यपि सुबुक्तगीन के काल से ही हो जाता है किंतु इस देश में महमूद गजनी के आक्रमणों का बड़ा ही महत्व है, दुर्भाग्यवश जब इस देश पर महमूद गजनवी का आक्रमण हुआ उस समय भारत की स्थिति अत्यंत सोचनीय थी महमूद की सफलता में इसका बहुत बड़ा सहयोग था |

महमूद गजनवी:राजनीतिक स्थिति

  • गजनबी आक्रमण काल में भारत की राजनीतिक स्थिति अच्छी नहीं थी | कुछ अंश में तो यह अरब आक्रमण काल की अपेक्षा विदेशी आक्रमणकारियों के लिए और भी अनुकूल थी |
  • आठवीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में कोई विदेशी उपनिवेश ना था, किंतु 10 वीं शताब्दी में यहां मुल्तान और मंसूरा के दो विदेशी राज्य थे | इन राज्यों की जनसंख्या के एक बड़े वर्ग ने इस्लाम को अंगीकार कर लिया था |
  • दक्षिण भारत में भी, विशेषकर मालाबार में और अरबों के उपनिवेश थे | इन भारतीय मुसलमानों की सहानुभूति गजनी तथा मध्य एशिया से आने वाले अपने मुसलमान बंधुओं के साथ थी |
  • इस समय भारत अनेक छोटे-बड़े राज्यों में बटा हुआ था, विभिन्न राज्यों के बीच आपसी सहयोग, एकता, देशभक्ति एवं राष्ट्रीयता की भावना की कमी थी |
  • सभी शासक अपने समक्ष दूसरे शासक को तुच्छ समझते थे |
  • डॉक्टर ईश्वरी प्रसाद ने तत्कालीन भारत को स्वतंत्र राज्यों का समूह कह कर पुकारा है, भारत एक भौगोलिक अभिव्यक्ति मात्र बनकर रह गया था |
  • गजनबी आक्रमण के समय मुल्तान तथा सिंध पर अरबों का राज्य था, अरब शासक नाम मात्र के लिए खलीफा का प्रभुत्व स्वीकार करते थे |
  • भारत के हिंदू शासक इस क्षेत्र के मुस्लिम शासकों के प्रति उदारता की नीति का पालन करते थे, अरबों तथा भारतीय मुसलमानों के साथ सहृदयता का बर्ताव किया जाता था |
  • उन्हें अपने धर्म का प्रचार करने तथा नए लोगों को मुसलमान बनाने की छूट थी देश भारत में हिंदू राजवंशों का शासन था यहां कुछ प्रमुख राज्यों का उल्लेख अनिवार्य हो जाता है |

सामाजिक स्थिति

  • भारतीय समाज में इस काल में घुसी हुई बुराइयों ने भी आक्रमणकारियों को सहयोग दिया | समाज में संकीर्णता आ गई थी, समाज में ऊंच-नीच, अमीर-गरीब , छुआछूत आदि का गहरा भेदभाव था |
  • उच्च वर्ग के लोग नीच वर्ग के लोगों के साथ अभद्र व्यवहार करते थे, अमीरों के द्वारा गरीबों का शोषण किया जा रहा था |
  • समाज में ब्राह्मणों तथा क्षत्रियों का सर्वाधिक सम्मान था, शुद्र तथा चांडालों की स्थिति दयनीय हो गई थी | अतः सुविधा विहीन तथा शेष इस वर्ग के लोग काफी असंतुष्ट थे ,और अपने जातिगत संगठनों को दृढ़ करके अपना सामाजिक सम्मान बढ़ाना चाहते थे |
  • समाज में स्त्रियों की स्थिति भी पहले की अपेक्षा गिर गई थी, उनका सम्मान घट गया था स्त्रियां भोग विलास का साधन मात्र बनकर रह गई थी |
  • बाल विवाह, विधवा विवाह, निषेध बालिका हत्या, बहु विवाह, पर्दे की प्रथा तथा सती प्रथा आदि प्रथाएं स्त्री समाज को घुन की तरह नष्ट कर रही थी |
  • भारतीय समाज में पृथकत्व की भावना बलवती होती गई, लोगों में राष्ट्रीय उत्साह तथा देशभक्ति की भावनाओं का लोप हो चुका था |
  • इस काल तक विचारों की संकीर्णता भारतीयों के चरित्र का एक अंग बन गई थी, भारतवासी कूप-मंडूक बन गए थे और परस्पर या विदेशियों से मिलना जुलना और विचार विनिमय करना अर्थहीन समझते थे |
  • उनका विश्वास था कि एक देश राष्ट्र, धर्म एवं जाति के रूप में वे विश्व श्रेष्ठतम थे |
  • प्रसिद्ध विद्वान अलबरूनी लिखता है कि “हिंदुओं के पूर्वज इतने शंकर विचारों के न थे, जितने इस युग 11वीं शताब्दी के लोग थे”|
  • उसको यहां देख कर बड़ा ही आश्चर्य हुआ था कि “हिंदू लोग यह नहीं चाहते थे कि जो एक बार अपवित्र हो चुका है उसे पुनः शुद्ध करके अपना लिया जाए”|
  • इस संकीर्णता और कूप मंडूकता के कारण इस समय भारत का अन्य देशों से अधिक संपर्क नहीं रह गया | विदेशों में होने वाली घटनाओं से भारतीय अनभिज्ञ रहे |
  • देश की रक्षा करना क्षत्रियों का ही उत्तरदायित्व समझा जाता था, ना कि संपूर्ण देशवासियों का सामूहिक कर्तव्य | समाज के विभिन्न वर्गों में जागरूकता की कमी थी और लोग मातृभूमि की रक्षा के लिए सचेत नहीं थे |
  • समाज गतिहीन तथा निष्क्रिय हो गया था |

आर्थिक स्थिति

  • यद्यपि आर्थिक दृष्टि से भारत संपन्न था, किंतु दुर्भाग्यवश उसकी संपन्नता भी उसके दुख का कारण बन गई भारत एक धन-धान्य से युक्त देश था |
  • कृषि, विभिन्न उद्योग-धंधे तथा वाणिज्य-व्यवसायों की उन्नति के कारण देश में धन दौलत की काफी वृद्धि हो गई थी |
  • व्यक्तियों ने खूब धन संचित कर लिया था देवालयों में आधुनिक बैंकों की भर्ती अपार संपत्ति एकत्र थी | भारत विदेशी आक्रमणकारियों के लिए ‘सोने की चिड़िया’ था|
  • भारत की असीम संपत्ति की कहानी का विदेशों में भी प्रचार था विदेशी लुटेरों के लिए यह प्रलोभन उन्हें भारत पर आक्रमण करने के लिए बाध्य कर रहा था |
  • महमूद के भारतीय आक्रमण का प्रधान उद्देश्य भारतीय संपत्ति का अपहरण करना ही था, एक ओर हम भारत के आर्थिक संपन्नता को देखते हैं तो दूसरी ओर भारतीय अर्थव्यवस्था की बुराइयों भी देखने को मिलती है |
  • आर्थिक दृष्टि से समाज विभिन्न वर्गों में गहरी असमानता थी | राजा, सामंत, दरबारी, व्यापारी तथा अधिकारीगणों का जीवन तो समृद्ध एवं विलासपूर्ण था, किंतु दूसरी और गांव के साधारण लोग, कृषक, मजदूर आदि अभाव पीड़ित नहीं रहते हुए भी सुख चैन की जिंदगी नहीं जी सकते थे |
  • उन्हें कठोर परिश्रम करना पड़ता था तब जाकर वह दो समय का खाना जुटा पाते थे इस प्रकार की आर्थिक विषमता सदा ही हानिकारक साबित होती है |

धार्मिक स्थिति

  • समाज की तरह धार्मिक क्षेत्र में भी भारत में उच्च आदर्शों का हम इस काल में अभाव पाते हैं | धर्म में भी अधः पतन होने लगा था |
  • यद्यपि शंकराचार्य के प्रयत्नों के कारण इस काल में पौराणिक हिंदू धर्म का उत्थान हुआ था, किंतु इस धर्म में भी अनेक बुराइयां थी | अंधविश्वास, प्रबल मूर्ति-पूजा, मंदिर-निर्माण, कर्मकांड, व्रत, उपवास, उत्सव आदि पर काफी जोर दिया जाता था |
  • हिंदू धर्म में अनेक शक्तिशाली संप्रदायों का विकास हुआ था | इनके बीच पारस्परिक संघर्ष था | शैव एवं वैष्णव परस्पर संघर्षरत थे |
  • इस काल में वाममार्गी संप्रदाय अधिक प्रभावशाली हो गया था, इसके अनुयाई सूरापान, मांसाहार, व्यभिचार आदि दुर्व्यसनों में लिप्त रहते थे |
  • यह ‘खाओ पियो और मौज करो‘ वाले सिद्धांत के समर्थक थे, नालंदा जैसे शैक्षिक संस्थाओं में भी इन दूषित भावनाओं का प्रदर्शन देखने को मिला है |
  • मंदिरों एवं मठों में धन का बाहुल्य था यहां देवदासियाँ तथा अन्य स्त्रियां भी रहती थी, स्त्री और धन के संगम से विलासिता और भ्रष्टाचार का आगमन होता था |
  • इस प्रकार इस काल में एवं मंदिर व्यभिचार एवं भ्रष्टाचार के अड्डे बन गए | धर्म में नैतिकता और आध्यात्मिकता का अभाव रहा |
  • साधु संत और सन्यासी श्रद्धा की अपेक्षा उपहास के पात्र बन गए, इस काल में बौद्ध धर्म का पतन हुआ धर्म की यह स्थिति भारत में इस्लाम धर्म के प्रचार में सहायक हो सकती थी |

सांस्कृतिक स्थिति

  • इस युग में हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में पतन आया शिक्षा एवं साहित्य पर भी दूषित वातावरण का प्रभाव पड़ा |
  • इस काल में उत्कृष्ट साहित्य की रचना बहुत कम हुई, साहित्य की सभ्यता और सुरुचि का अंत हो गया |
  • अश्लील पुस्तकों की रचना में विद्वानों को संकोच नहीं होता था, भारतीय स्थापत्य कला, चित्रकला तथा अन्य ललित कलाओं पर भी बुरा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है |
  • संक्षेप में किसी योग्य एवं महत्वाकांक्षी आक्रमणकारी के लिए भारत में परिस्थितियां बिल्कुल अनुकूल थी, देश की पतनोन्मुखी राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक स्थिति आक्रमणकारियों को निमंत्रण दे रही थी |
  • तुर्कों ने इस ईश्वर अवसर से लाभ उठाया और भविष्य में भारत में एक विस्तृत मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना कर ली |

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