मुगल प्रशासन-मनसबदारी व्यवस्था Useful for UPSC 2023

मनसबदारी व्यवस्था

मुगल
  • अकबर द्वारा स्थापित प्रशासन तंत्र और राजस्व व्यवस्था को जहांगीर और शाहजहां ने कुछ परिवर्तनों के साथ जारी रखा | परंतु मनसबदारी व्यवस्था की कार्य पद्धति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए |
  • अकबर के अधीन अपनी सैनिक टुकड़ी के व्यय के लिए मनसबदारों को औसतन ₹240 प्रति वर्ष प्रति सवार दिए जाते थे | जहांगीर के शासनकाल में उसे घटाकर ₹200 कर दिया गया |
  • सवारों को उनकी राष्ट्रीयता और घोड़े के स्तर के अनुसार अदायगी की जाती थी | मुगल मिश्रित सैनिक टुकड़ियों के पक्ष में थे | प्रत्येक टुकड़ी में ईरानी, तूरानी, मुगल, भारतीय, अफगान और मुसलमान समान संख्या में रखने की व्यवस्था थी |
  • जहांगीर ने एक प्रणाली प्रारंभ की जिसके अनुसार कुछ विशेष सरदारों को जात दर्ज में कोई वृद्धि किए बिना अधिक सवार रखने की इजाजत दी जा सकती थी |
  • इस प्रणाली को दो अस्पा व सिंह अस्पा प्रणाली कहते थे | जिसका शाब्दिक अर्थ था दो या तीन घोड़ा वाला सवार | सामान्याता किसी भी मनसबदार को उसकी जात दर्जे से ऊंचा सवार दर्जा नहीं दिया जाता था |
  • शाहजहां के शासनकाल में अनेक परिवर्तन देखने को मिलते हैं जिसका उद्देश्य किसी सरदार द्वारा रखे जाने वाले सवालों की अपेक्षित संख्या में अत्यधिक कमी कर देना था |
  • इस प्रकार सरदार से अपने सवार दर्जे के केवल एक तिहाई सवार तथा कुछ परिस्थितियों में तो केवल एक चौथाई सवार ही रखने की अपेक्षा की जाती थी |
  • मनसबदारो के वेतन रुपयों में निर्दिष्ट होते थे परंतु उन्हें सामान्य रूप से नगद भुगतान नहीं किया जाता था बल्कि इसके बदले उन्हें जागीरे दी जाती थी |
  • जागीरो के आवंटन के लिए राजस्व विभाग को एक बही रखनी पड़ती थी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की वसूली गई आमदनी दर्ज होती थी | परंतु लेखा रुपयों में नहीं बल्कि दामों में दिखाया जाता था |
  • इस दस्तावेज को जमा-दामी आमदनी कहा जाता था | मनसबदारों की अत्यधिक संख्या और कई दूसरे कारणों से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर बहुत दबाव पड़ रहा था |
  • एक नई युक्ति अपनाकर सरदारों द्वारा अपने सवार दर्जे के अनुसार रखे जाने वाले सवारो और घोड़ों की संख्या में कमी कर दी गई | मुगलों की मनसबदारी प्रणाली अत्यंत जटिल थी |
  • उसका कुशलता से कार्य करना कई बातों पर निर्भर था | इसमें दाग प्रणाली व जागीरदारी प्रथा का उचित अमल आचरण भी शामिल था |

मुगल सेना

  • घुड़सवार मुगल सेना के प्रमुख वाहिनी थे तथा मनसबदार अधिक से अधिक घुड़सवार जुटाते थे | मनसबदारों के अतिरिक्त स्वयं मुगल बादशाह भी फुटकर घुड़सवार रखते थे जिन्हें अहदी कहा जाता था |
  • वह अहदीयों को भद्र घुड़सवार कहा जाता है तथा उनके वेतन दूसरे घुड़सवारो से अधिक होते थे | वह बहुत ही विश्वस्त सैन्य दल के सदस्य होते थे | उनकी भर्ती स्वयं शहंशाह किया करते थे तथा उनकी हाजिरी लेने के लिए अलग अधिकारी होते थे |
  • अहदीयों के कर्तव्य बहुमुखी होते थे | शाही कार्यालयों के अधिकतर मुंशी (क्लर्क) दरबार के चित्रकार और शाही कारखानों के फोरमेन इसी सैन्य दल से चुने जाते थे | अनेक अहदीयों को सहायकों और शाही फरमानों के वाहकों के पदों पर नियुक्त किया जाता था |
  • इसके अतिरिक्त अनेक अहदी कुशल बंदूकचियो और धुनर्धरों (तीरंदाजी) की तर्ज पर काम करते थे | अहदीयों के अतिरिक्त शहंशाह एक शाही अंगरक्षकों का दल रखते थे |
  • वह लोग घुड़सवार होते थे, लेकिन नगर दुर्ग और राजमहल में पैदल काम करते थे | पैदल सैनिकों की संख्या बहुत बड़ी थी लेकिन वह कई हिस्सों में बैठे हुए थे उनमें से बहुत से लोग बंदूकची थे |
  • यही लोग वास्तविक पैदल सेना थे लेकिन पैदल सैनिकों में भार वाहक, नौकर-चाकर, हरकारे तलवारबाज, पहलवान और गुलाम शामिल रहते थे |
  • गुलामों की संख्या उतनी नहीं थी जितने की सल्तनत काल में थी | उन्हें खाना-पीना, कपड़ा-लत्ता, बादशाह या शाही परिवार के लोगों से मिलता था |
  • कभी-कभी गुलाम अहदी का पद भी हासिल कर लेते थे, अहदी प्रतिष्ठा वाले सिपाही थे |
  • लेकिन सामान्यतः पैदल सैनिकों का दर्जा निम्न होता था | मुगल शहंशाह के पास लड़ाई में काम आने वाले हाथियों का एक विशाल हाथी खाना होता था और साथ ही एक सुसंगठित तोपखाना भी |
  • तोपखाने के 2 हिस्से होते थे जिसमें से एक भाग था- भारी तोपखाना | इस तोपखाने की तोपों का प्रयोग किलो की रक्षा करने और शत्रु के किलों को भेदने के लिए किया जाता था |
  • दूसरा भाग था- हल्का तोपखाना | इस तोपखाने को आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता था | जब भी शहंशाह चाहता था, यह तोपखाना उसके साथ चलता था |
  • आरंभ में बहुत से उस्मानियों और पुर्तगालियों को तोपखाना विभाग में रखा गया | फ्रांसीसी यात्री बरनियर ने (जो शहंशाह के साथ लाहौर और कश्मीर गया था), हल्के तोपखाने को बहुत प्रभावकारी बताया था |
  • वह कहता है उसमें 50 मैदानी तोपे शामिल थी सभी पीतल की बनी हुई थी | प्रत्येक तोप एक सुदृढ़ और भली-भांति रंगी पुती गाड़ी पर रखी होती थी, जिसे दो बहुत मजबूत घोड़े खींचते थे तथा एक तीसरा घोड़ा वक्त पर काम आने के लिए साथ रखा जाता था |
  • रहीमी 1500 टन भार वाहन क्षमता वाला मुगल जहाज था | अकबर ने पील खाना विभाग की स्थापना की थी |

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