मुगल साम्राज्य का संपूर्ण इतिहास एवं पतन-|Examsly| Useful for UPSC

मुगल साम्राज्य के शासक

मुगल साम्राज्य का संपूर्ण इतिहास एवं पतन(1526-1707AD)
मुगल साम्राज्य का संपूर्ण इतिहास एवं पतन(1526-1707AD)

बाबर 1526-1530 ईसवी

  • बाबर का जन्म 14 फरवरी 1483 को ट्रांस ऑक्सीयाना के एक छोटे से राज्य फरगना में हुआ था |
  • इसका पूरा नाम जहीरूद्दीन मोहम्मद बाबर था | इसके पिता का नाम उमर शेख मिर्जा (तैमूर वंश) तथा माता का नाम कुतलुग निगार खान (चंगेज खान के वंशज) था | वह कृष्णदेवराय व नुसरत शाह का समकालीन था |
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा तुजुक ए बाबरी तुर्की भाषा में लिखी थी | 1494 में 14 वर्ष की अल्पायु में बाबर ट्रांस ऑक्सीयाना के फरगना नमक एक छोटे से राज्य की गद्दी पर बैठा |
  • मध्य एशिया के अन्य अशंख्य कार्यों की तरह बाबर भी भारत के धन की ख्याति सुनकर उसकी ओर आकृष्ट हुआ था उसने सुन रखा था कि भारत सोने चांदी का देश है |
  • तैमूर यहां से अतुलित संपत्ति एवं कुशल कारीगर लेकर लौटा था जिसके कारण उसने अपने एशियाई साम्राज्य को सुदृढ़ता प्रदान की थी तथा अपनी राजधानी को भव्य बनाया था साथ ही उसने पंजाब के छात्रों को अपने साम्राज्य में भी मिला लिया था बाबर की भारत विजय की आकांक्षा का एक और भी कारण था कि उसे काबुल से बहुत कम आए होती थी |
  • उत्तर पश्चिम भारत की राजनीतिक परिस्थिति भारत में बाबर के प्रवेश के लिए उपयुक्त थी | 1517 ईसवी में सिकंदर लोदी की मृत्यु हो चुकी थी तथा दिल्ली की गद्दी पर इब्राहिम लोदी आसींन था |
  • अफगान सरदारों में एक सबसे दुर्धर्ष व्यक्ति पंजाब का सूबेदार दौलत खान लोदी था | दौलत खां का पंजाब का लगभग स्वतंत्र शासक था 1518-19 बाबर ने भेरा के शक्तिशाली दुर्ग को जीत लिया था |
  • इसके पश्चात जब बाबर काबुल लौटा तो दौलत खान ने उसके प्रतिनिधि को भेरा से निकाल दिया 1520-21 में बाबर ने एक बार पुनः सिंधु नदी पार कर आसानी से भेरा और सियालकोट को जीत लिया दौलत खां के पुत्र दिलावर खाने के नेतृत्व में एक दूत मंडल बाबर के पास पहुंचा उन्होंने बाबर को भारत आने के लिए निमंत्रित किया था |

हुमायूं 1530-40, 1555-56

  • बाबर के चार पुत्रों हुमायूं, कामरान अस्करी हींदाल में हुमायूं सबसे बड़ा था | बाबर की मृत्यु के बाद 30 दिसंबर 1530 में उसका पुत्र हुमायूं सिंहासन पर बैठा |
  • हुमायूं ने अपने पिता के आदेश के अनुसार कामरान को काबुल एवं कंधार, अस्करी को संभल तथा हिंडाल को अलवर की जागीर दी | इसके अतिरिक्त अपने चचेरे भाई सुलेमान मिर्जा को बदख़्शा की जागीर दी |
  • 1530 ईसवी में हुमायूं ने कालिंजर का अभियान किया जिसका शासक प्रताप रुद्रदेव था | 1532 में उसने दौराह नामक स्थान पर बिहार को जीतने वाली अफगान सेना को परास्त कर दिया तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में जौनपुर पर अधिकार कर लिया |
  • हुमायूं ने चुनार पर घेरा डाला यह सशक्त दुर्ग आगरा और पूर्व के मध्य के थल मार्ग और नदी मार्ग को नियंत्रित करता था तथा पूर्वी भारत के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता था |
  • शेर खान इस समय अफगान सरदारों में सबसे अधिक शक्तिशाली था | 4 महीने की घेराबंदी के बाद हुमायूं शेरखान के समझौते के प्रस्ताव पर सहमत हो गया जिसके अनुसार चुनार के किले पर शेरखान का अधिकार कायम रहना तथा इसके स्थान पर उसने मुगलों के प्रति वफादार रहने का वचन दिया और बंधक के रूप में अपना एक बेटा हुमायूं के पास भेज दिया |
  • गुजरात के शासक बहादुर शाह की बढ़ती हुई शक्ति तथा आगरा की सीमा पर पड़ने वाले क्षेत्र तक फैली उसकी गतिविधियों से हुमायूं चिंतित हो उठा था | बहादुर शाह लगभग हुमायूं की उम्र का योग और महत्वाकांक्षी शासक था 1526 में गद्दी पर बैठते हैं उसने मालवा भी जीत कर अधिकार कर लिया था |

अकबर

  • अकबर का जन्म अमरकोट (सिंध के थार जिले में) के राणा वीरसाल के महल में 15 अक्टूबर 1542 को हुआ था | अकबर की माता का नाम हमीदा बानो बेगम था |
  • जो हुमायूं के भाई हिनदाल के सिया गुरु मीर बाबा दोस्त शेख अली अकबर की पुत्री थी | हुमायूं की मृत्यु के समय अकबर कलानौर (पंजाब) में था | अकबर के संरक्षक बैरम खा ने 10 फरवरी 1556 में ईटों का एक सिंहासन बनवाकर उसे बादशाह घोषित कर दिया |
  • दिल्ली में 11 फरवरी को अकबर के सम्राट बनने की सूचना दी गई | कलानौर में मात्र 13 साल 4 महीने की उम्र में अकबर को मुगल वंश का ताज पहना दिया गया |
  • बैरम खान को मुगल बादशाह का वजीर बनाकर उसे khan-e-khana का खिताब दिया गया | हेमू एक हिंदू शासक था जिसने अपना जीवन इस्लाम शाह के अधीन एक बाजार अधीक्षक के रूप में आरंभ किया था लेकिन आदिलशाह की सेवा में उसने महत्वपूर्ण प्रतिष्ठा प्राप्त कर ली थी |
  • वह 22 युद्ध कर चुका था तथा उनमें से किसी भी युद्ध में उसे पराजय का सामना नहीं करना पड़ा था | आदिल शाह ने हेमू को विक्रमादित्य का खिताब देकर अपना वजीर नियुक्त कर लिया था |
  • हेमू ने आगरा पर अधिकार कर लिया और 50,000 गुड सवारों 500 हाथियों और एक दस्ता दोनों के साथ दिल्ली की ओर बढ़ा एक भीषण युद्ध में हेमू ने दिल्ली के निकट मुगलों को पराजित कर दिया और नगर पर अधिकार कर लिया |

जहांगीर

  • जहांगीर को युवावस्था में अवध और बंगाल का सूबेदार नियुक्त किया गया था | सन 1605 में अकबर की मृत्यु के पश्चात जहांगीर बादशाह बना | वह अकबर की भांति धार्मिक और सामाजिक सुधारों में रुचि रखता था |
  • उसने अपना स्मरण तुजुक ए जहांगीरी स्वयं लिखा था | जहांगीर को चित्रकला का अच्छा ज्ञान था तथा उसे अपने दरबार के श्रेष्ठ चित्रकारों पर गर्व था | सन 1611 में जहांगीर ने नूरजहां से विवाह किया जो एक सुंदर और बुद्धिमान स्त्री थी |
  • अपने विवाह के कुछ ही वर्षों पश्चात नूरजहां ने अपना दल बना लिया जिसे नूरजहां गुट या जुनता गुट के नाम से जाना गया | इस गुट में नूरजहां उसके पिता एत्माद्दौला, माता अस्मत बेगम उसका भाई आसिफ खान व शहजादा खुर्रम शामिल थे |
  • इस दल का प्रभुत्व 1622 ईसवी तक स्थापित रहा | जहांगीर के लंबे समय तक बीमार रहने के कारण नूरजहां ने उसके कार्य और साम्राज्य का शासन प्रबंध संभाला | प्रत्येक महत्वपूर्ण कार्य में जहांगीर उसकी राय लिया करता था |
  • वह इतनी शक्तिशाली हो गई कि राज्य के सिक्कों पर जहांगीर के नाम के साथ उसका नाम लिखा जाने लगा | जहांगीर को उसकी न्याय की जंजीर के लिए भी स्मरण किया जाता है उसने सोने की एक लंबी जंजीर बनवाई इसमें घंटियां बंधी हुई थी और उसको राजमहल की दीवार से लटका दिया गया |
  • उसने यह घोषणा की कि यदि किसी के साथ सरकार ने अन्याय पूर्ण व्यवहार किया हो तो वह इस जंजीर को खींचकर सरकारी अधिकारी के विरुद्ध अपनी फरियाद सुना सकता है |

शाहजहां

  • शाहजहां अपने पिता की मृत्यु के पश्चात सन 1628 में राज्य सिंहासन पर बैठा | इसके बचपन का नाम खुर्रम था यह जगत गोसाई जोधाबाई का पुत्र था | इसका विवाह नूरजहां के भाई आसिफ खान की पुत्री अर्जुम्मनद बानो बेगम से हुआ था जो मुमताज महल के नाम से प्रसिद्ध हुई |
  • शाहजहां ने दिल्ली के निकट शाहजहानाबाद नगर की स्थापना की तथा अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित कर दी वर्तमान में पुरानी दिल्ली के नाम से जाना जाता है |
  • इसी में उसने सुरक्षा दुर्ग का निर्माण कराया जिसे लाल किला या किला ए मुबारक के नाम से जाना जाता है | उसने इसी किले में दीवाने आम दीवाने खास का निर्माण करवाया था |
  • तख्ते ताऊस रत्नों से जुड़ा हुआ सोने का सिंहासन था जिस पर शाहजहां बैठता था इसी तक में कोहिनूर नामक कीमती हीरा जड़ा था शाहजहां को अपने शासनकाल में सबसे पहले बुंदेलखंड और दक्षिण के विद्रोह का सामना करना पड़ा था |
  • शाहजहां ने अपने पुत्र शहजादा औरंगजेब को दक्षिण का सूबेदार बनाया दक्षिण की समस्याओं को हल कर लेने के बाद शाहजहां का ध्यान उत्तर पश्चिम की ओर आकर्षित हुआ उसने उत्तर-पश्चिम सीमा को सुरक्षित करने के लिए मध्य एशिया के बल्ख और बदख़्शा मैं अपनी सेना भेजी |

औरंगजेब

  • औरंगजेब ने अपने सभी भाइयों को पराजित करके सन 1658 में सिंहासन पर अधिकार कर लिया | औरंगजेब आलमगीर के नाम से सिंहासन पर बैठा उसने लगभग 50 वर्ष तक शासन किया उसका शासनकाल कठिनाइयों से परिपूर्ण था |
  • सम्राट बनने के उपरांत औरंगजेब ने जनता के आर्थिक कष्टों के निवारण हेतु राह दारी (आंतरिक पारगमन शुल्क) और पानदारी व्यापारियों को समाप्त कर दिया | उसने उलेमा वर्ग की सलाह के अनुसार इस्लामी परंपरा के अनुसार शासन किया उसने नौरोज उत्सव और झरोखा दर्शन अकबर द्वारा प्रारंभ को समाप्त कर दिया |
  • उसने राज्य की गैर मुस्लिम जनता पर पुनः जजिया कर लगा दिया औरंगजेब ने हिंदू त्योहारों को सार्वजनिक रूप से बनाए जाने पर प्रतिबंध लगा दिया | उसने राज्य में सार्वजनिक नृत्य व संगीत पर भी प्रतिबंध लगा दिया है यद्यपि व्यक्तिगत जीवन में वह स्वयं एक कुशल वीणा वादक था |
  • औरंगजेब के शासनकाल में मुगल साम्राज्य का सबसे अधिक विस्तार हुआ वह लगभग संपूर्ण भारत पर शासन करता था पूना और कोंकण के आसपास का क्षेत्र पहाड़ी है इसी क्षेत्र में मराठे शक्तिशाली थे |
  • छापामार युद्ध प्रणाली को अपनाकर सेनाओं को परेशान करने में सफल होते रहे अपने व्यक्तिगत चारित्रिक गुणों के कारण औरंगजेब को जिंदा पीर के नाम से जाना जाता था |

मुगल साम्राज्य का पतन

Read Also….

Mughal Empire and its Decline(1526-1707AD)

Chalukya

Humayun 1530-40, 1555-56 AD

PDF National Movement 1923-39AD

Rise/Growth of Indian Nationalism 1857 AD

Harshavardhan and his empire

हर्षवर्धनऔर उसका साम्राज्य

सिकंदर के आक्रमण के परिणाम

ईरानी और मकदूनियाई आक्रमण

महमूद गजनबी 998-1030