यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन कीजिए-16th Important

इस टॉपिक में हम यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन के बारे में पड़ेंगे विस्तार से पड़ेंगे जिसमें हमने यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन, धर्म सुधार आंदोलन-परिचय सहित संपूर्ण जानकारी दी है | यूरोपीय देशों में धर्म सुधार आंदोलन की प्रगति के बारे में पूरी जानकारी आपको प्राप्त होगी |

यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन
यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन

धर्म सुधार आंदोलन-परिचय

  • धर्म सुधार आंदोलन-परिचय 16 वीं शताब्दी में जो धर्म सुधार आंदोलन हुए उन्हें सही अर्थों में पुनर्जागरण का ही विस्तार कहा जा सकता है | इस समय सामंतवाद और उससे जुड़ी आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक, एवं राजनीतिक मान्यताएं टूट रही है | लेकिन धर्म एवं चर्च का प्रभाव अभी भी ज्यों का त्यों बना हुआ है |
  • व्यापार और वाणिज्य का उदय, मध्यम वर्ग की प्रधानता, ज्ञान के विस्तार के कारण धर्म और चर्च में सुधारवादी परिवर्तन आवश्यक हो गया था | धर्म सुधार आंदोलन इसी प्रवृत्ति का प्रतीक था |
  • मध्ययुगीन चर्च व्यवस्था में कई प्रकार की बुराइयां विद्यमान थी | इन्हीं बुराइयों की प्रतिक्रिया में यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हुआ, यूरोप में बुराइयों के प्रति दो प्रकार की प्रतिक्रिया देखी गई |
  • प्रथम प्रतिक्रिया थी रोमन कैथोलिक धर्म सुधार लाकर रोमन कैथोलिक चर्च व्यवस्था को मजबूत बनाना इसे प्रति धर्म सुधार का नाम दिया गया |
  • इसी श्रेणी में दूसरे प्रकार की प्रतिक्रिया में मध्ययुगीन चर्च व्यवस्था को अस्वीकार कर दिया गया जिसे हम प्रोटेस्टेंट आंदोलन के नाम से जानते हैं |

यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन

  • पुनर्जागरण ने यूरोपीय जनमानस में जिस नवीन चेतना का संचार किया था, उसमें रोमन चर्च व्यवस्था की उन सभी मान्यताओं पर प्रहार किया जो गैर तार्किक या अन ऐतिहासिक थी |
  • इसी क्रम में पीटर लोंबारड और थॉमस एक्विनास की मान्यताओं के विरुद्ध संत अगस्टाइन की मान्यताओं को स्वीकार किया जाने लगा |
  • प्राचीन ग्रीक और रोमन साहित्य के पुनरुत्थान के कारण संत अगस्टाइन के विचारों पर नवीन प्रकाश पड़ा | यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन इस प्रकार इस में धर्म सुधार आंदोलन के लिए दार्शनिक आधार तैयार कर लिया |
  • 15 वी एवं 16 वी सदी में चर्च के अंतर्गत अनेक बुराइयां व्याप्त थी, जैसे- पादरियों की अज्ञानता और विलासिता चर्च के पदों एवं सेवाओं की बिक्री संबंधियों द्वारा एक से अधिक पद पर बने रहना आदि |
  • यह सभी बुराइयां बढ़ते असंतोष एवं शिकायत का कारण थी | वाणिज्य व्यापार के कारण जब मुद्रा प्रधान अर्थव्यवस्था अस्तित्व में आई तब लेने देने की परंपरा बड़े स्तर पर प्रारंभ हो गई ब्याज संबंधी चर्च के सिद्धांत के कारण व्यापारी एक ऐसा धर्म चाहते थे जो उनके कार्यों का समर्थन करें |
  • पुनर्जागरण के कारण प्रांतीय भाषाओं का उदय हुआ और राष्ट्रीयता का प्रभाव की भावना प्रबल हुई | अन्य देशों के राष्ट्र वादियों के लिए रोड स्थित एक विदेशी था | यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन के कारणों का वर्णन क्षमा पत्रों की बिक्री धर्म सुधार आंदोलन का तात्कालिक कारण था |
  • वस्तुत क्षमा पत्र धर्म युद्ध के दौरान उन लोगों को प्रदान किया जाता था, जो ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार के लिए अपनी सेवा प्रदान करते थे | कालांतर में इसका व्यवसायीकरण हो गया और इसे खुलेआम बेचा जाने लगा यह चर्च और पादरी की आय का प्रमुख स्रोत बन गया |
  • इसी समय पत्र के विरोध के क्रम में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हो गया | कैथोलिक संप्रदाय में पादरियों को विवाह करने की अनुमति नहीं थी, परंतु कई पादरियों ने विवाह कर लिया, इससे भी चर्च का पवित्र जीवन अनैतिक बनता जा रहा था |
  • चर्च में अनेक ऐसे लोग भी पहुंच गए जिनकी ना तो आध्यात्मिकता में रुचि थी और ना ही अपने धार्मिक कर्तव्य का पालन करने की क्षमता रखते थे कोई धनी व्यक्ति ऊंचे धार्मिक पद खरीद लेते थे |

यूरोपीय देशों में धर्म सुधार आंदोलन की प्रगति

  • जर्मनी स्थित कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के मध्य सबसे भीषण धर्म युद्ध जर्मनी में ही हुआ | यूरोपीय देशों में धर्म सुधार आंदोलन की प्रगति प्रोटेस्टेंट आंदोलन की शुरुआत जर्मनी से हुई प्रतिक्रिया स्वरूप स्पेन और फ्रांस जैसे कैथोलिक देशों ने इस आंदोलन का दमन करने का प्रयास किया |
  • लेकिन जर्मन राज्य ने फ्रांस के साथ मिलकर स्मॉल कोड की स्थापना की और स्पेन के सम्राट चार्ज पंचम के विरुद्ध युद्ध 1546 ईसवी छेड़ दिया | 9 वर्षों तक चले इस खूनी गृह युद्ध के पश्चात अंततः दोनों पक्षों के बीच ऑक्सबर्ग की संधि 1555 ईसवी के द्वारा शांति स्थापित हो गई |
  • इसका विधिवत अंत वेस्टफालिया की संधि 1848 के द्वारा हुआ | इस युद्ध का जर्मनी में कोई निश्चित परिणाम नहीं निकला लेकिन दूसरी ओर इससे जर्मन राज्यों की समृद्धि अवश्य नष्ट हो गई |
  • अनिश्चित परिणाम के बावजूद भी जर्मनी में प्रोटेस्टेंट मतावलंबीओ का वर्चस्व बना रहा | स्विट्जरलैंड में राष्ट्रीय चेतना का उदय हो चुका था यहां प्रोटेस्टेंट संप्रदाय लोकप्रिय होता जा रहा था |
  • दूसरी ओर यहां के अनेक नगरों में व्यापारिक और वाणिज्यिक गतिविधियां तीव्र हो चुकी थी | इसका सहज और स्वाभाविक परिणाम यह हुआ कि नवोदित पूंजीपति वर्ग की महत्वाकांक्षाए रोमन कैथोलिक चर्च के आदेशों से टकराने लगी यही वजह है कि यहां भी प्रोटेस्टेंट आंदोलन लोकप्रिय होने लगा जो कि केल्विन और जिनगाली के नेतृत्व में हुआ |
  • स्विट्जरलैंड में इस आंदोलन के कारण ऑस्ट्रिया पर यह दबाव डाला जाने लगा कि इस देश को स्वतंत्र कर दिया जाए इस दबाव के कारण ऑस्ट्रिया के सम्राट मैक्सिमिलियन को इसे स्वतंत्र करना पड़ा और इस प्रकार स्विट्जरलैंड में प्रोटेस्टेंट मतावलंबीओ की विजय हुई |
  • प्रोटेस्टेंट आंदोलन को सबसे अधिक विरोध का सामना स्पेन में करना पड़ा | स्पेन के सम्राट कैथोलिक धर्म के कट्टर समर्थक थे और वे किसी भी स्थिति में इसकी सत्ता बनाए रखना चाहते थे |
  • उनका यह प्रयास इसलिए भी उल्लेखनीय है कि 16 वी सदी में स्पेन विश्व की सबसे बड़ी सैनिक शक्ति माना जाता था | स्पेनी शासक के विरुद्ध नीदरलैंड के विद्रोह का सबसे प्रमुख कारण धार्मिक था |
  • उत्तरी नीदरलैंड में जहां रोमन कैथोलिक चर्च का प्रभाव था वहीं दक्षिणी नीदरलैंड में केल्विन वाद का प्रचार प्रसार तेजी से हो रहा था | ब्रिटेन के सम्राट हेनरी VIII और एडवर्ड VI ने प्रोटेस्टेंट आंदोलन का नेतृत्व प्रदान किया |
  • हेनरी अष्टम के निर्देश पर ब्रिटिश संसद में सर्वोच्च अधिनियम पारित किया जिसके अनुसार इंग्लैंड के साथ सबको इंग्लैंड के चर्च का सर्वोच्च अधिकारी घोषित किया गया |
  • अब पॉप इंग्लिश चर्च का प्रधान नहीं रहा रोमन चर्च से संबंध विच्छेद कर लिया गया और मठों की संपत्ति ज़ब्त कर ली गई क्रैमर को कैंटरबरी का विषप बनाया जिसने कैथरीन के साथ हेनरी VIII के विवाह को गैरकानूनी घोषित घोषित कर दिया |
  • हेनरी ने इन अनबोलिन के साथ विवाह कर लिया | वास्तव में वह रोम के पृथक होकर इंग्लैंड का स्वतंत्र कैथोलिक चर्च बनाए रखना चाहता था | उसके समय में एंग्लो चर्च न तो पूरी तरह कैथोलिक रह सका और ना ही प्रोटेस्टेंट |
  • हेनरी VIII की उत्तराधिकारी एलिजाबेथ 1603 हुई जो हेनरी और कैथरीन की पुत्री थी | वह एक योग्य शासिका थी उसे धर्म से उतना ही लगाव था जितना राजनीतिक हितों के लिए आवश्यक हो |
  • इस आंदोलन की लोकप्रियता फ्रांस में भी फैलने लगी जो फ्रांस में योजन के नाम से जाने जाते थे और यह फ्रांसीसी केल्विन वादी में फ्रांस की कुल जनसंख्या को दसवां भाग थे |
  • कैथरिन द मेडिसी के शासनकाल 1547-1559 इसमें प्रोटेस्टेंट आंदोलन को आगे आने का मौका मिला लेकिन उसके विरोधी बहुसंख्यक थे परिणाम एक खूनी संघर्ष हुआ जिसमें 1572 इसी में बड़ी संख्या में प्रोटेस्टेंट मारे गए |

धर्म सुधार की सफलता

  • मार्टिन लूथर ज़्विंगली केल्विन के प्रयत्नों से यूरोप में धर्म सुधार आंदोलन प्रारंभ हुआ तथा कई देशों में सुधार को के सिद्धांतों के अनुसार धर्म सुधार की सफलता चर्च के संगठनों में परिवर्तन किए गए |
  • फ्रांस और स्पेन को छोड़कर यूरोप के अधिकांश देशों में प्रोटेस्टेंट धर्म मजबूत होने लगा | इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और उत्तरी जर्मनी के राज्यों ने पोप का विरोध किया |
  • इन देशों में प्रोटेस्टेंट धर्म के प्रचार में विधि ब्रिटेन के शासक हेनरी अष्टम का योगदान उल्लेखनीय रहा | प्रोटेस्टेंट वाद की सफलता का पहला कारण था कि लूथर ने किसानों द्वारा विद्रोह करने पर उनको अपना समर्थन नहीं दिया इसलिए सुविधा प्राप्त वर्ग उनके विरोधी ना होकर सहायक हो गए तथा धर्म सुधार में उनकी सहायता की |
  • धर्म सुधार की सफलता का दूसरा कारण था कि लूथर एवं केल्विन में राष्ट्रीयता की भावना को पॉप की सर्वोपरिता के विरुद्ध उभारा उनकी दृष्टि में किसी भी राज्य के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप अनुचित था |
  • राज्य आंतरिक मामलों में सर्वम है ऐसी इन सुधारकों की धारणा थी |

प्रतिवादी धर्म सुधार आंदोलन

  • धर्म सुधार आंदोलन के परिणाम स्वरूप मध्यकालीन यूरोप आधुनिक यूरोप में परिवर्तित होता चला गया | इस आंदोलन ने उस प्रक्रिया की शुरुआत की जिसने यूरोप को मध्यकालीन मान्यताओं एवं जड़ता से न सिर्फ मुक्त किया बल्कि नई आर्थिक गतिविधियों के साथ सामंजस्य विस्थापित किया |
  • 16वीं शताब्दी में हुए धर्म सुधार आंदोलनों के अनेक परिणाम हुए 16 वीं शताब्दी के धर्म सुधार आंदोलन तथा पृष्ठों की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि अपने स्थायित्व के लिए रोमन कैथोलिक चर्च में भी सुधार आवश्यक है अतः अपनी सुरक्षा की दृष्टि से कैथोलिक सुधार आंदोलन का सूत्रपात किया जिससे प्रतिवादी या प्रतिवादात्मक धर्म सुधार आंदोलन कहा गया |
  • आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य चर्च के संगठन एवं कार्य विधि से संबंधित सिद्धांतों में परिवर्तन लाना धर्म सिद्धांतों की व्याख्या और धर्म प्रचार का कार्य करना था | इतिहासकार स्वेटर भी मानते हैं कि रोमन कैथोलिक में सुधार की प्रेरणा क्रांति के महत्वपूर्ण परिणामों में से एक थी |

धर्म सुधार आंदोलन का परिणाम

  • धर्म सुधार आंदोलन में राष्ट्रीय साहित्य एवं क्षेत्रीय भाषाओं का पर्याप्त विकास हुआ | धर्म सुधार आंदोलन का परिणाम लूथर ने बाइबिल का जर्मन भाषा में तथा केल्विन ने फ्रेंच में अनुवाद किया, जो अत्यधिक लोकप्रिय हुआ |
  • स्वाभाविक रूप से इससे अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश आदि भाषाओं के विकास का मार्ग भी प्रशस्त हुआ | धर्म से संबंध अनेक लेख और परिचय उसने अपनी मातृभाषा में लिखे तथा प्रकाशित कराए |
  • अब तक जो प्रतिष्ठा लैटिन को प्राप्त थी वह लोक भाषाओं को भी मिलने लगी | धर्म सुधार आंदोलन का परिणाम स्वरूप मातृभाषा के प्रति श्रद्धा की भावना का विकास हुआ | विवाह एक धार्मिक संस्कार ना रह कर संविदा मात्र रह गया |
  • वह विचार और अनैतिक संबंधों में तालाब की अनुमति मिल सकती थी | चर्च की संपत्ति पर अधिकार का समर्थन करके और ब्याज वाला अर्जन की भावना को उचित बताकर सुधार वादियों ने पूंजीवाद के विकास का मार्ग प्रशस्त किया |
  • धर्म सुधार आंदोलन का परिणाम स्वरूप यूरोप में मानवतावाद व व्यक्तिवाद की अवधारणा पर अधिक बल दिया गया | प्रोटेस्टेंटवाद के उदय के साथ ही कैथोलिक और प्रोटेस्टेंटो के मध्य पारस्परिक वैमनस्यता उत्पन्न हो गई |
  • वह परस्पर एक दूसरे का मुलोछेदन करना चाहते थे | 1560 से 1630 तक का काल डाकिनी आसेट इतिहास का एक बुरा समय था | जादूगरनिओ को खोज कर जीवित जला देने की इस प्रथा ने पागलपन का रूप धारण कर लिया था |
  • धर्म सुधार आंदोलन ने ईश्वर के साथ प्रत्येक व्यक्ति से सीधे संबंध को स्थापित कर व्यक्ति की स्वतंत्रता का व अस्मिता के विकास में योगदान दिया | प्रत्येक व्यक्ति को बाइबल पढ़कर स्वयं उसकी व्याख्या करने की प्रेरणा दी गई |
  • व्यक्ति पर धर्म का प्रभाव कम होने से व्यक्तित्व को अधिक महत्व प्राप्त हुआ | आतंकवादियों ने अधिकांश धार्मिक प्रतीकों, मूर्ति, चित्र आदि को अस्वीकार करके उनको ध्वस्त कर दिया |
  • जिससे ललित कला को नुकसान पहुंचा धार्मिक आंदोलनों ने व्यक्ति एवं ईश्वर के मध्य को अस्वीकार करके तथा प्रत्येक व्यक्ति को बायबिल का व्याख्याता बनाकर व्यक्तिवाद तथा विचार स्वतंत्र को प्रोत्साहित किया |
  • धर्म सुधार आंदोलन का परिणाम अभिव्यक्ति का एक परिणाम था जो 15 वी शताब्दी से अंत एवं 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में संघर्ष तथा उथल पुथल के रूप में यूरोप में दिखाई दे रहा था |
  • धर्म सुधार आंदोलन के मूल स्वरूप के लिए चुनौती नहीं था |

Read More…

Pallavas

What were the leading causes of the Renaissance, Meaning, signs, and Effects in16th Century

पुनर्जागरण से आप क्या समझते हैं कारण अर्थ लक्षण प्रभाव संपूर्ण जानकारी

पुनर्जागरण के लक्षण

मुगल साम्राज्य का संपूर्ण इतिहास एवं पतन(1526-1707AD)

बाबर 1526-1530 ईसवी

Knowing all about the Mughal Empire and its Decline(1526-1707AD)

All about Indian National Movement PDF 1923-39AD

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी का योगदान 

भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के कारण 1857