Best Notes:महमूद गजनबी 998-1030

प्रारंभिक जीवन:महमूद गजनबी

महमूद
  • महमूद गजनबी का जन्म 1971 ईस्वी में हुआ था उसकी माता जाबुलिस्तान के एक सरदार की कन्या थी |
  • महमूद गजनबी अपने पिता की तरह योग्य एवं वीर था उसे बाल्यकाल में इस्लामी ढंग की श्रेष्ठ शिक्षा दी गई थी बाल्यकाल से ही उसमें वीरोचित गुणों और युद्ध प्रियता का विकास हुआ उसने अपने पिता के साम्राज्य विस्तार और धर्म प्रचार के सपनों को साकार कर उसकी समस्त आशाओं को पूर्ण कर दिया |
  • किशोरावस्था में ही उसने हिरात , खुरासान, निशापुर, आदि के विरुद्ध तथा पंजाब के जयपाल के विरुद्ध युद्ध में अपने पिता को सक्रिय सहयोग दिया था |
  • वहां युद्ध कला एवं राज कौशल में अत्यंत प्रवीण था |
  • अपने पिता के शासनकाल में वह खुरासान का प्रांतीय शासक था सुबुक्तगीन की मृत्यु के पश्चात गजनी के अमीरों ने उसके छोटे भाई इस्माइल को गद्दी पर बैठा दिया किंतु जल्द ही महमूद ने इस्माइल को युद्ध में पराजित कर गद्दी पर अपना अधिकार कर लिया |

महमूद गजनबी का राज्यारोहण

  • सुबुक्तगीन की मृत्यु के 1 वर्ष बाद गृह युद्ध में सफलता के पश्चात 998 ईसवी में बड़े शान शौकत के साथ महमूद गजनी गद्दी पर आरुढ़ हुआ |
  • राज्यारोहण के समय उसकी अवस्था 27 वर्ष की थी उस समय उसके राज्य में अफगानिस्तान और खुरासान सम्मिलित थे |

महमूद गजनबी के प्रारंभिक अभियान

  • महमूद गजनबी अत्यंत प्रतिभाशाली और महत्वाकांक्षी युवक था | वह अपने छोटे से राज्य को एक विशाल एवं शक्तिशाली साम्राज्य के रूप में परिणत करना चाहता था |
  • मध्य एशिया के सामानी वंश के गृहयुद्ध का लाभ उठाकर उसने सामानी सुल्तान से बलपूर्वक खुरासान को छीन लिया |
  • इस प्रकार बुखारा राज्य के आधे भाग पर उसका अधिकार हो गया | अब वह गजनी का स्वतंत्र शासक बन गया और उसने सुल्तान की पदवी धारण की | बगदाद के खलीफा अल-कादिर बिल्लाह ने उसके पद को मान्यता प्रदान की और उसे यमीन उद दौला और यामीन उल मिल्लाह की उपाधियों से विभूषित किया |
  • महमूद ने अपनी शक्तिशाली सेना रण कौशल और सफल नेतृत्व के बल पर अपने पड़ोसी राज्यों पर बलपूर्वक अधिकार कर लिया |
  • इस प्रकार उसने 999 ईसवी में खुरासान 1002 में सीस्तान 1012 ईस्वी में गर्शिस्तान 1017 में ख्वारिज्य और उसके बाद 1019 ईस्वी में गौर राज्यों को परास्त कर उन्हें अपने साम्राज्य में मिला लिया |
  • इन प्रारंभिक सफलताओं से उत्साहित होकर महमूद ने अपना ध्यान भारत की ओर आकृष्ट किया कहते हैं कि खलीफा को प्रसन्न करने के लिए उसने प्रतिज्ञा कि वह प्रतिवर्ष भारत के मूर्तिपूजक हिंदुओं के विरुद्ध धर्मयुद्ध किया करेगा |
  • गजनी ने 1004 में मुल्तान के राजा फतह दाउद पर किया, आनंदपाल हिंदूशाही वंश के 1008 ई. पर किया, 1009 ई. में नगरकोट (कांगड़ा) पर आक्रमण कर लुटपाट की। इसके बाद 1015 ई में कश्मीर पर आक्रामण किया जब लोहार वंश की शासिका रानी दिदा से महमूद गजनबी पराजित हो गया था।
  • महमूद गजनबी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया जो कि पूरे इतिहास में प्रसिद्ध आक्रमण रहा है |

महमूद के भारतीय आक्रमण के उद्देश्य

आर्थिक उद्देश्य

  • महमूद गजनबी ने 1020 से लेकर 1027 तक भारत वर्ष पर 17 बार आक्रमण किए और देश के विभिन्न क्षेत्रों में लूटपाट मचाई |
  • आखिर उसका इन आक्रमणों के पीछे क्या उद्देश्य था ? इस प्रश्न को लेकर विद्वानों के बीच गहरे मतभेद है वस्तुतः उसने अनेक उद्देश्य और प्रयोजनों से भारत पर आक्रमण किए उनका हम संक्षेप में यहां उल्लेख करेंगे |
  • प्रोफ़ेसर हबीब डॉक्टर मोहम्मद नाजिम और डॉक्टर एस एम जाफर जैसे विद्वान महमूद के आक्रमण का प्रधान उद्देश्य लूट का लोग ही बताते हैं |
  • इस उद्देश्य को छिपाने के लिए उसने धर्म की तो केवल आड़ ली थी |
  • श्री हैबल का कथन है कि यदि बगदाद में इतना धन मिलने की संभावना होती जितना कि सोमनाथ में थी तो महमूद उसे भी इतनी निर्दयता से लूटता उत्बी ने अपने आश्रय दाता के इस धन लोग को धार्मिक उत्साह के भव्य आवरण से ढकने का यत्न किया है |
  • बी ए स्मिथ एवं डॉक्टर ईश्वरी प्रसाद तथा प्रोफेसर एस आर शर्मा का भी मत है कि भारत में सदियों से वंचित धन को लूटना ही उसका प्रधान उद्देश्य था |

धार्मिक उद्देश्य

  • अनेक इतिहासकारों का मत है कि महमूद गजनबी के आक्रमणों का उद्देश्य भारत में इस्लाम धर्म का प्रचार करना भी था |
  • उसका दरबारी लेखक उत्बी ने लिखा है कि भारत पर उसके आक्रमण जिहाद के रूप में थे और उनका उद्देश्य भारत में प्रचलित मूर्ति पूजा को समाप्त कर इस्लाम का प्रसार करना था इसलिए महमूद ने मूर्तियों को तोड़ा और मंदिरों को लूटा उसने खलीफा को ऐसा करने का आश्वासन भी दिया था |
  • कुछ मुस्लिम लेखकों के मतानुसार महमूद गजनबी ने केवल इस्लाम धर्म का प्रचार ही नहीं किया बल्कि इसके गौरव को भी बढ़ाया उन्होंने उसे अल्लाह के रास्ते पर चलने वाले एक ऐसे मुजाहिद के रूप में प्रस्तुत किया है कि जिस के पद चिन्हों का अनुकरण कर सभी पार्क मुसलमान बादशाह गर्व का अनुभव करेंगे |
  • डॉक्टर जीम ने भी महमूद को एक धर्म प्रचारक के रूप में स्वीकार किया है इनका मत है कि सोमनाथ के मंदिर की क्षति मूर्ति पूजा पर इस्लाम की चमत्कार पूर्ण विजय थी और धर्म रक्षक के रूप में समस्त मुस्लिम संसार में महमूद की प्रशंसा की गई |
  • कुछ आधुनिक मुस्लिम इतिहासकार महमूद के आक्रमणों का उद्देश्य धार्मिक था यह मानने को तैयार नहीं है उनका कहना है कि महमूद ने इस्लाम का प्रचार अर्थ भारत पर आक्रमण नहीं किया था किंतु उत्तरी के लेख से यह प्रमाणित हो जाता है कि महमूद ने काफिरों के देश भारत में इस्लाम धर्म का प्रचार करने के लिए आक्रमण किए थे |
  • अलबरूनी ने भी जो महमूद का समकालीन था इस बात को स्वीकार करता है महमूद कट्टर सुन्नी मुसलमान था अतः इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि इस्लाम का प्रसार करना उसके भारतीय आक्रमणों का उद्देश्य रहा है लेने ऐसा ही माना है |

राजनीतिक उद्देश्य

  • कुछ इतिहासकारों की अवधारणा है कि महमूद भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना भी करना चाहता था इसी उद्देश्य से उसने पंजाब को जीता था |
  • गिबन सी बी वैद्य तथा डॉक्टर नाजिम तो उसे एक सफल शासक भी मानते हैं किंतु कुछ ऐसे प्रमाण हैं जिनके आधार पर सहज ही कहा जा सकता है कि भारत में साम्राज्य स्थापित करना महमूद का लक्ष्य नहीं था |
  • पंजाब को उसने अपने साम्राज्य में इसलिए सम्मिलित किया कि वह पंजाब को अपने कार्यकलापों का केंद्र बना कर भारत पर सुगमता पूर्वक बार बार आक्रमण कर सकता था |
  • महमूद ने उत्तर भारत के अन्य क्षेत्रों पर आक्रमण किया और जीता किंतु सिर्फ पंजाब को छोड़कर उसने किसी भी क्षेत्र पर अपना अधिकार नहीं किया अगर वहां भारत में अपने साम्राज्य की स्थापना की इच्छा रखता तो वह ऐसा कभी नहीं करता |
  • महमूद इस बात को अच्छी तरह से समझता था कि भारत एक विशाल देश है उस पर गजनी जैसे दूरस्थ नगर से शासन करना असंभव है वैसे भी उसका अपना ही साम्राज्य अत्यंत विस्तृत था |
  • भारत के मिल जाने से उसका विस्तार और अधिक हो जाता और ऐसे विस्तृत साम्राज्य को सुरक्षित एवं संभाल कर रखना एक व्यक्ति के लिए असंभव था |
  • भारत की गर्म और आर्द्र जलवायु ठंडे प्रदेश में रहने वाले महमूद के समर्थकों के अनुकूल ना थी |
  • भारतीय राज्यों को लूटना सहज हो सकता था किंतु उन पर विजय प्राप्त कर स्थाई शासन स्थापित करना अत्यंत कठिन था महमूद ऐसी घटनाएं मोल नहीं लेना चाहता था |

SEE ALSO…

Post Mauryan Period

Mahmud Ghazni